“I love Muhammad” विवाद: कैसे बने Yogi Adityanath के लिए राजनीतिक हथियार, Akhilesh Yadav क्यों बैकफुट पर?a
एक लोकल मुद्दे से इंडिया की राजनीति तक

“I love Muhammad” की शुरुआत सितंबर के पहले सप्ताह में Kanpur के Barawafat जुलूस के दौरान हुई, जब इस phrase वाला बैनर लगाया गया।
स्थानीय Hindu groups ने इसे “नई परंपरा” बताकर विरोध किया। पुलिस ने एक्शन लिया, तो विवाद और बढ़ गया।
यह विवाद अब सिर्फ Kanpur तक सीमित ना रहकर Uttar Pradesh, Uttarakhand, Telangana, और Maharashtra के कई शहरों में फैल गया। Bareilly व Nagpur में clashes देखी गईं।
Yogi Adityanath को कैसे मिला political ammo?
यह विवाद धीरे-धीरे एक simple local issue से “Hindutva vs Religious Extremism” में बदल गया।
Navratri के समय इस मुद्दे ने Yogi Adityanath को हिंदू भावनाएं consolidate करने का मौक़ा दे दिया।
मुख्यमंत्री अब खुलकर public statements में कहते हैं कि: “हिंदू त्योहारों पर माहौल खराब करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं होगी।”
Maulana Tauqeer Raja सहित कई मुस्लिम नेताओं पर पुलिस ने सख्त कार्रवाई शुरू की है।
Samajwadi Party – Akhilesh Yadav बैकफुट पर क्यों?
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Akhilesh Yadav और उनकी Samajwadi Party की बड़ी मुश्किल ये है कि उन्हें अल्पसंख्यक वोट बैंक नाराज़ नहीं करना, लेकिन हिंदुत्व के मंच पर खुलकर विरोध भी नहीं कर सकते।
SP प्रवक्ता Sumaiya Rana ने Bareilly में “I love Muhammad” का खुला समर्थन किया, तो पार्टी को तुरंत सफाई देनी पड़ी।
Kanpur unrest के prime accused Zubair Ahmed Khan को गिरफ्तार किया गया, जो हाल में SP में शामिल हुए थे।
पार्टी का PDA (Pichhda, Dalit, Alpasankhyak) outreach अब संकट में दिखता है।
क्या अब पूरा मामला हो गया Hindu vs Muslim?
विश्लेषक कहते हैं, Navratri और त्योहारी माहौल में “I love Muhammad” मुद्दा सीधे Hindu vs Muslim divide में बदल सकता है।
SP के लिए आगे बढ़ना मुश्किल—मुद्दे को अनदेखा करते हैं तो अल्पसंख्यक वोट lose हो सकते हैं, खुलकर विरोध करें तो बहुसंख्यक वोट खतरे में पड़ सकते हैं।
यही रणनीतिक दुविधा है जिसपर Yogi Adityanath अपना मुद्दा बनाए रखेंगे।
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