Dhanteras pe jhaadu kyu kharida jaata hai? जानिए इसके रहस्यमयी और शुभ कारण

Dhanteras pe jhaadu kyu kharida jaata hai? जानिए इसके रहस्यमयी और शुभ कारण

dhanteras pe jhaadu kyu kharida jaata hai भारत में हर त्यौहार का एक गहरा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व होता है। धनतेरस (Dhanteras) दिवाली से पहले मनाया जाने वाला ऐसा पर्व है, जो धन, स्वास्थ्य, और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
इस दिन लोग सोना-चांदी, बर्तन, झाड़ू, और नई चीजें खरीदते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि Dhanteras pe jhaadu kyu kharida jaata hai?

Dhanteras, जिसे “Dhantrayodashi” भी कहा जाता है, कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है।
यह दीपावली की शुरुआत का पहला दिन होता है और धन की देवी माता लक्ष्मी, स्वास्थ्य के देवता धन्वंतरि तथा कुबेर देव की पूजा का विशेष महत्व होता है।

कहा जाता है कि इस दिन जो भी व्यक्ति नई वस्तुएं (जैसे सोना, चांदी, बर्तन या झाड़ू) खरीदता है, उसके घर में माता लक्ष्मी का आगमन होता है और धन की वृद्धि होती है।

Dhanteras pe jhaadu kyu kharida jaata hai

झाड़ू केवल एक सफाई का साधन नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति में यह मां लक्ष्मी का प्रतीक मानी जाती है।
इस दिन नई झाड़ू खरीदने की परंपरा सदियों पुरानी है। इसके पीछे कई धार्मिक और प्रतीकात्मक कारण हैं

लक्ष्मी का प्रतीक है झाड़ू

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी स्वच्छता की देवी हैं।
जहाँ सफाई होती है, वहीं लक्ष्मी का वास होता है।
इसलिए धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदना और घर की सफाई करना, लक्ष्मी के स्वागत का एक शुभ संकेत माना जाता है।

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नकारात्मक ऊर्जा को हटाने का प्रतीक

वास्तु शास्त्र के अनुसार, झाड़ू केवल धूल नहीं हटाती बल्कि घर की नकारात्मक ऊर्जा और दरिद्रता को भी दूर करती है।
इस दिन पुरानी झाड़ू को घर से निकालकर नई झाड़ू लाना, पुरानी नकारात्मकता को त्यागना और नई सकारात्मक ऊर्जा का स्वागत करना दर्शाता है।

झाड़ू से जुड़ा धन आकर्षण का संकेत

झाड़ू को धन का प्रतीक भी माना जाता है।
कहा जाता है कि जिस घर में झाड़ू का सम्मान होता है, वहाँ मां लक्ष्मी कभी नाराज़ नहीं होतीं।
इसीलिए धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदकर उसे पूजा में रखा जाता है और दिवाली की रात लक्ष्मी पूजन में उपयोग किया जाता है।

ज्योतिषीय महत्व

धनतेरस के दिन धन का ग्रह “कुबेर” और आरोग्य के देवता “धन्वंतरि” की पूजा होती है।
इस समय ग्रहों की स्थिति ऐसी होती है कि नई वस्तुएं और स्वच्छता से जुड़ी चीजें खरीदना शुभ माना जाता है।
झाड़ू इस दिन खरीदने से कर्ज से मुक्ति, धन लाभ, और घर में सुख-शांति बनी रहती है।

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पुरानी परंपरा का वैज्ञानिक पक्ष

झाड़ू से सफाई करने से घर में धूल, कीटाणु, और नमी हटती है।
इससे घर स्वच्छ और रोगमुक्त रहता है।
वैज्ञानिक दृष्टि से भी सफाई और स्वास्थ्य का सीधा संबंध है — और यही कारण है कि हमारे पूर्वजों ने इसे धार्मिक परंपरा से जोड़ा।

धनतेरस पर झाड़ू खरीदते समय ध्यान रखने योग्य बातें

1. झाड़ू शाम या सूर्यास्त से पहले खरीदें।

2. झाड़ू हमेशा दुकान के मालिक के हाथ से लें, किसी कर्मचारी से नहीं।

3. झाड़ू खरीदकर घर लाने के बाद उसे लक्ष्मी पूजन के स्थान पर रखें

4. अगले दिन (नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली) से नई झाड़ू का प्रयोग शुरू करें।

5. पुरानी झाड़ू को घर के किसी कोने में न रखें — उसे घर से बाहर respectfully त्याग दें।

झाड़ू से जुड़े कुछ धार्मिक संकेत

संकेतअर्थ
झाड़ू को सीधा खड़ा नहीं रखना चाहिएलक्ष्मी का अपमान माना जाता है
झाड़ू पर पैर नहीं रखना चाहिएधन हानि का संकेत
झाड़ू सुबह और शाम प्रयोग करेंनकारात्मक ऊर्जा को हटाता है
नई झाड़ू धनतेरस पर खरीदनाधन और सुख का प्रतीक

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धनतेरस पर झाड़ू की पूजा कैसे करें?

1. झाड़ू को घर लाने के बाद गंगाजल या शुद्ध जल से साफ करें।

2. उस पर हल्दी, रोली, चावल और फूल अर्पित करें।

3. झाड़ू पर लाल या पीले कपड़े की बंधी हुई डोरी लगाएं।

4. “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जाप करें।

5. झाड़ू को माता लक्ष्मी के पास रख दें और दिवाली की रात इसका प्रयोग करें।

धनतेरस पर झाड़ू खरीदने के लाभ

1. घर में धन की बरकत बनी रहती है।

2. नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

3. कर्ज और आर्थिक बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

4. मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

5. घर में सुख, शांति और सौभाग्य आता है।

पुराणों में वर्णन है कि एक बार लक्ष्मी जी पृथ्वी पर आईं तो उन्होंने देखा कि कुछ घर अत्यंत गंदे हैं।
उन्होंने कहा —

“मैं जहाँ स्वच्छता नहीं, वहाँ वास नहीं करती।”

तब से यह परंपरा चली कि धनतेरस से दिवाली तक घर की पूरी सफाई और नई झाड़ू की खरीदारी की जाती है ताकि लक्ष्मी जी प्रसन्न होकर घर में प्रवेश करें।