What space sunlight really does to human skin: Do astronauts need sunscreen in space?

अंतरिक्ष की दुनिया में सूरज की रोशनी मानव त्वचा पर क्या प्रभाव डालती है, यह सवाल वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए हमेशा से एक दिलचस्प विषय रहा है। हालांकि हम पृथ्वी पर सनस्क्रीन का उपयोग करते हैं, लेकिन क्या अंतरिक्ष में भी ऐसी ही सुरक्षा की आवश्यकता होती है?

अंतरिक्ष में सूरज की किरणें पृथ्वी की तुलना में कहीं अधिक तीव्र होती हैं क्योंकि वहाँ का वातावरण हमारी ग्रह की तरह सूर्य की हानिकारक किरणों को पूरी तरह से नहीं रोक पाता। यह अधिक हाई-एनर्जी विकिरण देता है जो त्वचा के लिए खतरनाक हो सकता है। इससे त्वचा में जलन, जलन और यहाँ तक कि त्वचा कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।

अंतरिक्ष यात्रियों के लिए, यह जोखिम और भी अधिक हो जाता है क्योंकि वे लंबे समय तक बाहरी अंतरिक्ष या अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में रहते हैं जहां सूरज की रोशनी सीधे उनकी त्वचा पर पड़ती है। इसलिए, विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरिक्ष में sunscreen का इस्तेमाल अत्यंत आवश्यक हो जाता है, खासकर उन मिशनों के दौरान जहाँ लंबे समय तक सूरज की दीप्ति के संपर्क में रहना पड़ता है।

NASA और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियां इस जोखिम को कम करने के लिए विशेष प्रकार के sunscreens विकसित कर रही हैं जो अंतरिक्ष की स्थिति में भी प्रभावी हों। इसके अलावा, अंतरिक्ष सैटेलाइट और सूट में UV प्रोटेक्शन की सुविधा भी दी जाती है।

निष्कर्षतः, What space sunlight really does to human skin: Do astronauts need sunscreen in space? का जवाब हाँ है। अंतरिक्ष में भी सनस्क्रीन का इस्तेमाल जरूरी होता है ताकि त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से सुरक्षित रखा जा सके। जैसे हम पृथ्वी पर अपनी त्वचा की रक्षा करते हैं, ठीक वैसे ही अंतरिक्ष यात्रियों के लिए भी यह सुरक्षा आवश्यक है।